SULTANE JAHAN MAHBOOBE KHUDA
•﷽•
صَلُّو ا عَلَی الْحَبِیب ! صلَّی اللّٰہُ تعالٰی علٰی محمَّد
#नात_शरीफ़
🌷 सुल्ताने जहां मह़बूबे ख़ुदा तेरी शान व शौकत क्या कहना 🌷
🌷 हर शै पे लिखा है नाम तेरा तेरे ज़िक्र की रिफ़्अत क्या कहना 🌷
🌷 है सर पर ताज नुबूव्वत का जोड़ा है तन पे करामत का 🌷
🌷 सहरा है जबीं पे शफ़ाअत का उम्मत पे रह़मत क्या कहना 🌷
🌷 क़ुरआन कलामे बारी है और तेरी ज़ुबाँ से जारी है 🌷
🌷 क्या तेरी फ़साह़त प्यारी है और तेरी बलाग़त क्या कहना 🌷
🌷 बातों से टपकती लज़्ज़त है आंखों से बरसती रह़मत है 🌷
🌷 ख़ुत्बे से चमकती हैबत है ऐ शाहे रिसालत क्या कहना 🌷
🌷 आंखों से किया दरिया जारी और लब पे दुआ प्यारी प्यारी 🌷
🌷 रो रो के गुज़ारी शब सारी ऐ ह़ामिए उम्मत क्या कहना 🌷
🌷 आलम की भरें हर दम झोली ख़ुद खाएं तो बस जौ की रोटी 🌷
🌷 वह शानें अत़ा व सख़ावत की येह ज़ुहुद व क़नाअत क्या कहना 🌷
🌷 शोहरत है जमील इतनी तेरी यह सब है करामत मुर्शिद की 🌷
🌷 कहते हैं तुझे मद्दाह़े नबी सब अहले सुन्नत क्या कहना 🌷
।।। क़बालाए बख़्शिश , सफा 47 ।।।
अज़ क़लम ✍ मद्दाह़ुल हबीब मौलाना जमीलुर रहमान क़ादरी रज़वी رحمة الله عليه
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