उरसे मुफतिऐ आज़म

उरसे मुफतिऎ आज़म 


हम शबीहे गौसे आज़म मुफतिऎ आज़म मेरे 

नाइबे शाहे दोआलम मुफतिऎ आज़म मेरे 

फज़ले रबसे अफजल व आला अदद हमको मिला 

चालीसवां उरसे मुकररम मुफतिऎ आज़म मेरे 

नाज़ है तकवा तहारत को भि जिसकी ज़ात पर 

पीरे कामिल ओर मुअजज़म मुफतिऎ आज़म मेरे 

वकत के हाकिमने जिसकी इसतिकामत देखकर 

करदिया उसने भि सर खम मुफतिऎ आज़म मेरे

उममते सरकार पे नज़रे करम फरमाइये 

हर घडी है चशमे पुरनम मुफतिऎ आज़म मेरे 

दामने लुतफ व इनायत आपका जिसको मिला 

दहर का फिर उसको किया गम मुफतिऎ आज़म मेरे 

सदकऎ गोस व रज़ा बस यक नज़र कुन सुऎ मा 

घेरे हैं दुनया के सब गम मुफतिऎ आज़म मेरे 

कामयाबी हक़ परसती मे अता कीजिऎ हुजुर 

अरज़ करता हैे ये रुसतम मुफतिऎ आज़म मेरे 

अज़ कलम रुसतमुल कादरी बहराइची सुममा मेहकरवी

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