SARSUYE JHUKA PHIR

*इश्क़*

*सर सूए रोज़ा झुका फिर तुझको क्या?*
*दिल था साजिद नज्दीया फिर तुझको क्या?*

उनके नाम ए पाक पर दिल जान व माल
नज्दीया सब ताज दिया फिर तुझको क्या?

*या इबादी कह के हमको शाह ने*
*अपना बन्दा कर लिया फिर तुझको क्या?*

देव के बंदों से कब है यह खिताब!
तू न उनका था न है फिर तुझको क्या?

*नज्दी मरता है के क्यों ताज़ीम की*
*यह हमारा दीन था फिर तुझको क्या?*

देव तुझसे खुश है हम क्या करें!
हम से राज़ी है खुदा फिर तुझको क्या?

*देव के बंदों से हमको क्या गरज़ !*
*हम हैं अब्दे मुस्तफा फिर तुझको क्या?*

तेरी दोज़ख से तो कुछ छीना नही
खुल्द में पहोंचा _रज़ा_ फिर तुझको क्या?

*_इमाम ए इश्क़ व मुहब्ब्त, आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा (अलैहि रहमा)_*

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