Zikre Ahmad Se Seena Saja Hai

नात ए सरकारेे कायनातﷺ🌹

तालिबे दुआए शहादत:~फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली "रज़ा क़ादरी अमरोहीवी {07417474441}

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

वो भी दिल कोई दिल हैं जहां में
जिसमें तस्वीर ए तैबा नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

ला मंकां तक हैं तेरी रसाई
गीत गाती हैं सारी खुदाई,

वो जगह ही नहीं है दो जहां में
जिस जगह तेरा चर्चा नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

हम हुसैनी हैं कर्बला के शैदा
दिल कभी भी ना होता हैं मैला,

कुफ्र की धमकियों से डरे जो
आशिकों का कलैजा नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

दुश्मनें मुस्तफाﷺ से ये कह दो
ख़ैर चाहे तो हम से ना उलझे,

हम गुलामाने अहमद रज़ा हैं
कोई भी हमसे जीता नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

ख़ाक ए पाए नबीﷺ मुंह पे मलना 
इत्र हो मुस्तफा का पसीना,

उनकीﷺ चादर का टुकड़ा कफ़न हो
और कोई तमन्ना नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

हज की दौलत जिसे मिल ना पाए
जाए जाए वो घर अपने जाए,

माँ के क़दमों को चुमले जो
संग ए अस्वद को चूमा नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

ऐ मेरी मौत रुक जा अभी तू
फिर चलेंगे जहा तू कहेगी,

अपनी आंखें तसव्वुर में तैबा
मैने जी भर के देखा नहीं हैं,

ज़िक्र ए आकाﷺ से सीना सज़ा हैं
इश्क़ हैं ये तमाशा नहीं हैं,

"सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम सल्लल्लाहो अला मोहम्मदﷺ"🌹🌹
लेखक व तालिबे दुआ ए शहादत~•
✒️ *संबंधित दरगाह ए आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह बरेली शरीफ{पीर ओ मुर्शीद बद्दरूशरिया हुज़ूर अहसन मिया साहब क़िब्ला सज्जादानशीन दरगाह ए सरकार आला हजरत रहमतुल्लाह अलैह}*—•• *गुलाम ए अली फ़कीर मुआविया ज़फ़र गजाली रज़ा क़ादरी "अमरोहीवी"* {-07417474441}

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