MITTI TERI ZAMEE KI SONE SE BHALI HAI

*कलाम शाने ईमामें ज़मा अलैहिर्रेहमा ②*


मिट्टी तेरी ज़मी की सोने से भली हैं
खुल्दे शमा से बढ़कर अख़्तर तेरी गली हैं,

शफ़्फ़ाक सी फिज़ा हैं हर सम्त रौशनी हैं
जाकर बरेली देखे क्या सुन्नी ज़िन्दगी हैं,

दौज़ख़ में जाने वाले जन्नत में जा रहें हैं
अख़्तर इस जहां की क्या शाने रहबरी हैं,

जिसकी मिसाल काफ़िर लाए ना ला सकेगें
अख़्तर खुदा ने तुमको एक ऐसी शान दी हैं,

चाहत का हैं तकाज़ा अख़्तर दो जहां का
करना हैं काम लोगों जिसमें उन्हें खुशी हैं,

ईल्हाम हैं खुदा का खूबी नहीं ये मेरी
लगता तो हैं बज़ाहिर ग़ज़ाली की शाईरी हैं।

*📚 {हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}*

*लेखक व तालिबे दुआ ए शहादत~•*
✒️ *वाबस्ता आस्ताना ए आलाहज़रत रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा टी.टी.एस बरेली शरीफ {पीरो मुर्शीद बद्दरूशरिया हुज़ूर मुफ्ती अहसन मिया साहब क़िब्ला सज्जादानशीन आस्ताना ए सरकार आलाहजरत रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा}गुलाम ए अली अबू तुरआब फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी*

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