Munawwar Meri Aankhon ko
*मुनव्वर मेरी आँखों को मेरे शमशुद दोहा करदें*
*ग़मो की धूप में वो साया-ऐ-जुल्फ़े दोता करदें*
*जहाँ बानी अता करदे भारी जन्नत हिबाह करदें*
*नबी मुख्तार-ऐ कुल है जिसको जो चाहें अता करदें*
*जहाँ में उनकी चलती है वो दम में क्या से क्या करदें*
*ज़मीं को आसमाँ करदें सुर्रियाँ को सरां करदें*
*फ़िज़ा में उड़ने वाले यूँ ना इतरायें निदा करदें*
*वो जब चाहें जिसे चाहें उसे फ़रमा रवा करदें*
*मेरी मुश्किल को यूँ आसान मेरे मुश्किल कुशा करदें*
*हर एक मौजे बला को मेरे मौला ना ख़ुदा करदें*
*अता हो बेख़ुदी मुझकों ख़ुदी मेरी हवा करदें*
*मुझे यूँ अपनी उल्फ़त में मेरे मौला फ़ना करदें*
*जहाँ में आम पैग़ाम-ऐ-शाहे अहमद रज़ा करदें*
*पलट कर पीछे देखे फिर से तजदीदे-वफ़ा करदें*
*नबी से जो हैं बेगाना उसे दिल से जुदा करदें*
*पिदर मादर बिरादर माल-ओ-जाँ उन पर फिदा करदें*
*किसी को वो हँसाते हैं किसी को वो रुलाते है*
*वो यूँ ही आज़माते है अब तू फैसला करदें*
*गुले तय्यब में मिल जाओ गुलो में मिल के खिल जाओ*
*हयाते जावीदानी से मुझे यूँ आंशना करदें*
*उन्हें मंज़ूर है जब तक ये दौर आज़माइश हैं*
*ना चाहे तो अभी वो खत्म दौरे-ऐ-इब्तिला करदें*
*सगे आवारा-ऐ-सेहरा से उकता सी गयी दुनियां*
*बचाओ अब ज़माने का सगन-ऐ-मुस्तफा करदें*
*मुझे क्या फिक्र हो मेरे अख़्तर मेरे यावर गई वो यावर*
*बालाओ को जो मेरी खुद गिरफ़्तारे बला करदें*
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें