Mankabat E Huzoor tajushshariya
बाखुदा सबसे जुदा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।
इल्म का रोशन दिया है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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मुस्तफा की एक अता है सय्यदी अख़्तर रज़ा।
ग़ौस ओ ख्वाज़ा की दुआ है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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ये फ़क़ीहों ने कहा इनके फतवे देखकर।
आला हज़रत की रज़ा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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इल्म की खुशबू रज़ा के बाग से आने लगी।
फूल बनके जो खिला है सय्यदी अख्तर रज़ा।।
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इनकी सूरत को जमाना देख कर हैरान है।
दूल्हा बनकर जब चला सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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आला हज़रत के मिशन से जिसको भी तक़लीफ़ है।
हां उसी से बस खफ़ा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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उसके घर मे नज़दियों का आना जाना बंद है।
जिसके भी घर में लिखा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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कैसे भटकेंगे हम शरीयत की डगर से नज़दिया ।
जब हमारे रहनुमा हैं सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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जिसने चौदह सौ किताबे उम्मत को दी।
उस मुज़ददीद पर फिदा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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अए अज़हरियो देख लो सूरत हमारे पीर की।
चाँद जैसा चमक रहा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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सुन्नियत को छोड़ कर जो सुल्हेकुल्ली हो गया।
उस के ख़ातिर ज़लज़ला है सय्यदी अख्तर रज़ा।।
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अए तवीबो ले चलो हमको बरेली ले चलो।
हम मरीज़ों की दवा है सय्यदी अख़्तर रज़ा।।
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आज फिर "गुलाम ए रज़ा" झूम उठा है रंग में।
नारा तेरा जब लगा है सय्यदी अख्तर रज़ा।।
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